Shiv Chalisa Lyrics (Full) with Meaning in Hindi & English for Peace & Stability
Explore the full lyrics of Shiv Chalisa with Hindi and English meaning. Listen to the audio and understand every line for easy devotion and daily chanting.
Spiritual Essence
Connect with the infinite tranquility of Mahadev through the Shri Shiv Chalisa. These sacred verses celebrate the glory of Bholenath, guiding seekers toward mental peace, spiritual liberation, and deeper realization of the eternal self.
Hindi Meaning
श्री शिव चालीसा आदि और अंत से परे, परम सत्ता का ध्यान है। यह हमें सिखाती है कि सरलता और भोलापन ही ईश्वर को पाने का सबसे सीधा मार्ग है। यह मोक्ष की प्राप्ति, पापों के नाश और मन की परम शांति का एक दिव्य द्वार है जो आत्मा को शिवत्व से जोड़ता है।
English Meaning
Shri Shiv Chalisa is an invocation to the Absolute, the destroyer of illusion. It redefines life as a dance of creation and dissolution. It empowers the seeker to detach from the transient and anchor themselves in the eternal stillness of pure consciousness, finding peace amidst chaos.
Shiv Chalisa - AI Voice
Sacred Script
जय गणेश रिद्धि सिद्धि सहित, तुम्हे शीश नवाऊँ।
माता गौरी, पुत्र कार्तिकेय, का मैं ध्यान लगाऊँ।।
ब्रह्मा, विष्णु, महेश, त्रिदेवों का मैं ध्यान धरूँ।
चरणों में शीश नवाकर, मैं ये पाठ शुरू करूँ।।
चौपाई
जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत सन्तन प्रतिपाला।।
भाल चन्द्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के।।
अंग गौर शिर गंग बहाये। मुण्डमाल तन क्षार लगाये।।
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देखि नाग मन मोहे।।
मैना मातु की हवै दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी।।
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी।।
नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे।।
कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ।।
देवन जबहीं जाय पुकारा। तबहीं दुख प्रभु आप निवारा।।
किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी।।
तुरत षडानन आप पठायउ। लवनिमेष महँ मारि गिरायउ।।
आप जलन्धर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा।।
त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई।।
किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी।।
दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं।।
वेद नाम महिमा तव गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई।।
प्रगटी उदधि मंथन में ज्वाला। जरत सुरासुर भये विहाला।।
कीन्ही दया तहँ करी सहाई। नीलकण्ठ तब नाम कहाई।।
पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा। जीत के लंक विभीषण दीन्हा।।
सहस कमल में हो रहे धारी। कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी।।
एक कमल प्रभु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहं सोई।।
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर। भये प्रसन्न दिए इच्छित वर।।
जय जय जय अनन्त अविनाशी। करत कृपा सब के घट वासी।।
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै। भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै।।
त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। येहि अवसर मोहि आन उबारो।।
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट से मोहि आन उबारो।।
मात-पिता भ्राता सब कोई। संकट में पूछत नहिं कोई।।
स्वामी एक है आस तुम्हारी। आय हरहु मम संकट भारी।।
धन निर्धन को देत सदा हीं। जो कोई जांचे सो फल पाहीं।।
अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी। क्षमहु नाथ अब चूक हमारी।।
शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण विघ्न विनाशन।।
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं। नारद शारद शीश नवावैं।।
नमो नमो जय नमः शिवाय। सुर ब्रह्मादिक पार न पाय।।
जो यह पाठ करे मन लाई। ता पर होत है शम्भु सहाई।।
ॠनियां जो कोई हो अधिकारी। पाठ करे सो पावन हारी।।
पुत्र होन की इच्छा जोई। निश्चय शिव प्रसाद ते होई।।
पण्डित त्रयोदशी को लावे। ध्यान पूर्वक होम करावे।।
त्रयोदशी व्रत करै हमेशा। ताके तन नहीं रहै कलेशा।।
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे। शंकर सम्मुख पाठ सुनावे।।
जन्म जन्म के पाप नसावे। अन्त धाम शिवपुर में पावे।।
दोहा
नित नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश।।
Spiritual Guidance
Related Prayers
ganesh chalisa lyrics
Lakshmi
Durga
hanuman chalisa lyrics